Sunday, November 04, 2018

ગુજરાતી સાહિત્યના અદભુત શેર

મારી હસ્તી મારી પાછળ એ રીતે વિસરાઈ ગઈ,

આંગળી જળમાંથી નીકળી ને જગા પૂરાઈ ગઈ.

- ઓજસ પાલનપુરી

અધીરો છે તને ઈશ્વર બધુંયે આપવા માટે,

તું ચમચી લઈને ઊભો છે દરિયો માગવા માટે?

- અનિલ ચાવડા

જીવ હજી તો જભ્ભામાં છે,

ફાટી ગઈ છે જાત કબીરા.

- ચંદ્રેશ મકવાણા

તારું કશું ન હોય તો છોડીને આવ તું,

તારું જ બધું હોય તો છોડી બતાવ તું.

- રાજેશ વ્યાસ 'મિસ્કીન'

આભમાં કે દરિયામાં તો એક પણ કેડી નથી,

અર્થ એનો એ નથી કે કોઈએ સફર ખેડી નથી.

- રાજેશ

હું ક્ષણોના મ્હેલમાં જાઉં અને,

કોક દરવાજો કરી દે બંધ તો!

- ચિનુ મોદી

જીવી શકું હું કઈ રીતે તમને સ્મર્યા વગર,

પાંપણ કદીયે રહી શકે મટકું ભર્યા વગર?

- મનહર મોદી

પાનખર વીતી છતાં ખરતાં રહે છે

પાંદડાને લાગી આવ્યું પાંદડાનું.

- ઉદયન ઠક્કર

શ્વાસને ઈસ્ત્રી કરી મેં સાચવી રાખ્યા હતા,

ક્યાંક અણધાર્યા પ્રસંગે જો જવાનું થાય તો!

- અનિલ ચાવડા

કેવા શુકનમાં પર્વતે આપી હશે વિદાય,

નીજ ઘરથી નીકળી નદી પાછી વળી નથી.

- જલન માતરી

ઘર સુધી તું આવવાની જીદ ન કર,

ઘર નથી નહીંતર હું ના પાડું તને?

- ખલીલ ધનતેજવી

મને સદભાગ્ય કે શબ્દો મળ્યા તારે નગર જાવા,

ચરણ લઈ દોડવા બેસું તો વરસોના વરસ લાગે.

- મનોજ ખંડેરિયા

ક્રોધ મારો જોઈને ડરશો નહીં,

પુષ્પના ડાઘા કદી પડતા નથી.

- ચિનુ મોદી

ભૂલ જો થાય મિત્રોની તો માફ કર,

જીભ કચડાય તો દાંત તોડાય નૈં.

- અનિલ ચાવડા

ચિંતા કરવાની મેં છોડી,

જેવું પાણી એવી હોડી.

- ભાવેશ ભટ્ટ

સિગારેટને રસ્તા ઉપર આ રીતથી ન ફેંક ભાઈ,

આ દેશમાં ચંપલ ઘણાં તળિયેથી કાણા હોય છે.

- ભાવિન ગોપાણી

અફસોસ કેટલાય મને આગવા મળ્યા,

ગાલીબને મારા શેર નથી વાંચવા મળ્યા.

- ભરત વીંઝુડા

સંપ માટીએ કર્યો તો ઈંટ થઈ,

ઈંટનું ટોળું મળ્યું તો ભીંત થઈ.

- અનિલ ચાવડા

શ્રદ્ધાનો હો વિષય ત્યાં પુરાવાની શી જરૂર?

કુરઆનમાં તો ક્યાંય પયંબરની સહી નથી.

- જલન માતરી

બધો આધાર છે એના જતી વેળાના જોવા પર,

મિલનમાંથી નથી મળતા મહોબતના પુરાવાઓ.

*l- મરીઝ

જિંદગીને જીવવાની ફિલસુફી સમજી લીધી,

જે ખુશી આવી જીવનમાં આખરી સમજી લીધી.

- મરીઝ

કઈ તરકીબથી પથ્થરની કેદ તોડી છે ?

કૂંપળની પાસે શું કુમળી કોઈ હથોડી છે ?

- ઉદયન ઠક્કર

હું મંદિરમાં આવ્યો અને દ્વાર બોલ્યું,

પગરખાં નહીં બસ અભરખા ઉતારો.

- ગૌરાંગ ઠાકર

જત જણાવવાનું તને કે છે અજબ વાતાવરણ,

એક ક્ષણ તું હોય છે ને એક ક્ષણ તારું સ્મરણ.

- રાજેન્દ્ર શુક્લ

તમને સમય નથી અને મારો સમય નથી,

કોણે કહ્યું કે આપણી વચ્ચે પ્રણય નથી.

- બાપુભાઈ ગઢવી

રડ્યા ‘બેફામ’ સૌ મારા મરણ પર એજ કારણથી,

હતો મારો જ એ અવસર ને મારી હાજરી નહોતી.

- બરકત વિરાણી ‘બેફામ’

તફાવત એ જ છે,તારા અને મારા વિષે, જાહિદ!

વિચારીને તું જીવે છે, હું જીવીને વિચારું છું

- અમૃત ઘાયલ

જીવનની સમી સાંજે મારે જખ્મોની યાદી જોવી’તી,

બહુ ઓછાં પાનાં જોઈ શકયો બહુ અંગત અંગત નામ હતાં.

- સૅફ પાલનપુરી

તું કહે છે અશ્રુ ચાલ્યા જાય છે,

હું કહું છું જિંદગી ધોવાય છે.

– શયદા

વતનની ધૂળથી માથુ ભરી લઉં ‘આદિલ’,

અરે આ ધૂળ પછી ઉમ્રભર મળે ન મળે.

- આદિલ મન્સૂરી

બસ, દુર્દશાનો એટલો આભાર હોય છે,

જેને મળું છું, મુજથી સમજદાર હોય છે.

- મરીઝ

જિંદગીના રસને પીવામાં કરો જલ્દી ‘મરીઝ’,

એક તો ઓછી મદિરા છે, ને ગળતું જામ છે.

- મરીઝ

સમયની શોધ થઈ તેની આગલી સાંજે

મેં ઈંતજારને શોધ્યો હતો ખબર છે તને?

- મુકુલ ચોક્સી

હસ્તરેખા જોઈને સૂરજની કૂકડાએ કહ્યું,

આપના પ્રારબ્ધમાં બહુ ચડ-ઉતર દેખાય છે.

- ઉદયન ઠક્કર

મોત વેળાની આ ઐયાશી નથી ગમતી ‘મરીઝ’,

હું પથારી પર રહું ને આખું ઘર જાગ્યા કરે.

– મરીઝ

Tuesday, April 18, 2017

शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

राजीव शर्मा का सोनू निगम को जवाब: शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

April 17, 2017

जब गर्मियों का मौसम आता है तो मैं रात को खुले आसमान के नीचे सोना पसंद करता हूं। मीलों-मीलों तक फैला आसमान, उसमें चमकते ढेरों सितारे और खूबसूरत चांद देखकर मैं हर रोज सोचता हूं कि यह कायनात इतनी बड़ी है तो इसे बनाने वाला कितना बड़ा होगा! उसकी ताकत कितनी होगी! यही सोचते कब आंख लग जाती है, मालूम ही नहीं होता।

सुबह सूरज की रोशनी मुझे मजबूर कर देती है कि आंखें खोलूं। सूरज हर रोज अपने ठीक वक्त पर आ जाता है। अगर सूर्योदय के बाद भी मैं सोता रहूं और यह सोचकर दिल को दिलासा देता रहूं कि सो जा राजीव, अभी तो रात बहुत बाकी है! तो इसमें दोष मेरा है, सूरज का नहीं। वह हर रोज अपने वक्त पर आता रहेगा, अपने रास्ते चलता रहेगा। उसे परवाह नहीं कि किसकी नींद टूटती है और किसकी जारी रहती है। उसे आपके और मेरे हुक्म की जरूरत नहीं है।

मुझे याद है, आज से करीब 20 साल पहले हर सुबह मेरी आंखें अज़ान सुनकर खुलती थीं। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। सुबह-सुबह अज़ान दिलो-दिमाग को ऊर्जा से भर देती। अज़ान के बाद आरती की बारी आती। मंदिर से धूप और दीपक की सुगंध आरती को और मधुर एवं असरदार बना देती। मेरा न कभी आरती से वैर रहा और न ही अज़ान से कोई दुश्मनी। मुझे दोनों ही बहुत प्रिय हैं। अज़ान मेरे दिल का सुकून और आरती मेरे मन की ताकत।

रोज की तरह आज सुबह जब मैं नींद से उठा तो एक खास खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। संगीत की दुनिया के एक बहुत बड़े नाम सोनू निगम अज़ान से सख्त खफा हैं। उनका कहना है कि सुबह-सुबह उनकी नींद खराब न की जाए। निगम साहब ने आगे फरमाया है कि यह तो साफ-साफ गुंडागर्दी है। उन्हीं के शब्दों में, जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो उस दौर में बिजली नहीं थी। फिर यह शोर-शराबा क्यों?

सोनू निगम ने जो कहा, ये उनके निजी विचार हैं। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन वे कई गलतियां कर गए। पहली बात तो यह कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस्लाम नहीं बनाया था। इस्लाम अल्लाह का दीन है जिसके वे पैगम्बर हैं और पैगम्बर भी आखिरी।

निगम साहब को दिक्कत इस बात को लेकर है कि अज़ान से उनकी नींद में बाधा आती है। मेरा मानना है कि मंदिर हो या मस्जिद, उसके लाउड स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि दूसरे आसानी से सुन सकें, उन्हें परेशानी न हो। आमतौर पर मस्जिदों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। मस्जिदों में लाउड स्पीकर की ध्वनि का स्तर साधारण ही होता है।

अब बात करते हैं नींद में रुकावट की। मुंबई में फज्र की प्रार्थना का समय सुबह 5.05 बजे है। यह ऐसा वक्त नहीं होता कि लोग गहरी नींद में सोए हों और प्रार्थना भी कितनी देर के लिए! मुश्किल से तीन-चार मिनट। माना कि निगम साहब इस दौरान गहरी नींद में सोए हों, लेकिन यह भी संभव है कि उसी दौरान उस इलाके में हजारों लोग ऐसे हों जिनके लिए अज़ान नींद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।

निगम साहब बहुत बड़े और दौलतमंद शख्स हैं। सुकून से नर्म बिस्तर पर सोते होंगे, लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी गरीब लोग हैं जो चटाई को बिछौना और हथेलियों को तकिया बनाकर सोते हैं। हर सुबह उनकी आंखें अज़ान सुनकर ही खुलती हैं। इसके बाद वे जल्दी-जल्दी अपने काम-धंधे में जुट जाते हैं। अज़ान उनके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। ऐसा अलार्म जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

इसलिए निगम साहब को मेरा सुझाव है कि वे अपने आलीशान बंगले के बेडरूम में साउंड प्रूफ सिस्टम लगवा लें, क्योंकि उनकी खुशी के लिए अज़ान का वक्त तो बदलने वाला नहीं।

चलते-चलते निगम साहब से मेरा एक सवाल। माना कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जमाने में बिजली नहीं थी, लाउड स्पीकर नहीं थे और भी कई चीजें नहीं थीं। वह जमाना और था, ये जमाना और है। लेकिन हुजूर, हमने सुना है कि भारत में संगीत की जड़ें सामवेद से जुड़ी हैं। संगीत का पहला सुर सा सामवेद ने दिया था।

शिव के डमरू, कृष्ण की मुरली, नटराज की मुद्राओं से होता हुआ संगीत आज आपके युग में पहुंचा है। मैं आपसे पूछता हूं, ये हवाई जहाज, स्मार्टफोन, गाड़ी, ट्विटर, फेसबुक वगैरह उस जमाने में तो नहीं थे। फिर आप इस जमाने में इन्हें क्यों ढो रहे हैं? जींस-टी शर्ट छोड़कर धोती पहना करें।

क्यों नहीं इन्हें छोड़कर उसी सदियों पुराने जमाने में लौट जाते? आज ही अपना स्मार्टफोन दीवार पर दे मारें या किसी गरीब को दान कर दें। बॉलीवुड के बड़े लोग रात को पार्टियां करें और दिनभर नींद में खोए रहें तो यह आम लोगों की जिम्मेदारी नहीं कि वे उनकी नींद की हिफाजत करें। कसूर अज़ान का नहीं, आपका है। कृपया वक्त पर सोया करें। शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –

शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

राजीव शर्मा का सोनू निगम को जवाब: शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

April 17, 2017

जब गर्मियों का मौसम आता है तो मैं रात को खुले आसमान के नीचे सोना पसंद करता हूं। मीलों-मीलों तक फैला आसमान, उसमें चमकते ढेरों सितारे और खूबसूरत चांद देखकर मैं हर रोज सोचता हूं कि यह कायनात इतनी बड़ी है तो इसे बनाने वाला कितना बड़ा होगा! उसकी ताकत कितनी होगी! यही सोचते कब आंख लग जाती है, मालूम ही नहीं होता।

सुबह सूरज की रोशनी मुझे मजबूर कर देती है कि आंखें खोलूं। सूरज हर रोज अपने ठीक वक्त पर आ जाता है। अगर सूर्योदय के बाद भी मैं सोता रहूं और यह सोचकर दिल को दिलासा देता रहूं कि सो जा राजीव, अभी तो रात बहुत बाकी है! तो इसमें दोष मेरा है, सूरज का नहीं। वह हर रोज अपने वक्त पर आता रहेगा, अपने रास्ते चलता रहेगा। उसे परवाह नहीं कि किसकी नींद टूटती है और किसकी जारी रहती है। उसे आपके और मेरे हुक्म की जरूरत नहीं है।

मुझे याद है, आज से करीब 20 साल पहले हर सुबह मेरी आंखें अज़ान सुनकर खुलती थीं। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। सुबह-सुबह अज़ान दिलो-दिमाग को ऊर्जा से भर देती। अज़ान के बाद आरती की बारी आती। मंदिर से धूप और दीपक की सुगंध आरती को और मधुर एवं असरदार बना देती। मेरा न कभी आरती से वैर रहा और न ही अज़ान से कोई दुश्मनी। मुझे दोनों ही बहुत प्रिय हैं। अज़ान मेरे दिल का सुकून और आरती मेरे मन की ताकत।

रोज की तरह आज सुबह जब मैं नींद से उठा तो एक खास खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। संगीत की दुनिया के एक बहुत बड़े नाम सोनू निगम अज़ान से सख्त खफा हैं। उनका कहना है कि सुबह-सुबह उनकी नींद खराब न की जाए। निगम साहब ने आगे फरमाया है कि यह तो साफ-साफ गुंडागर्दी है। उन्हीं के शब्दों में, जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो उस दौर में बिजली नहीं थी। फिर यह शोर-शराबा क्यों?

सोनू निगम ने जो कहा, ये उनके निजी विचार हैं। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन वे कई गलतियां कर गए। पहली बात तो यह कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस्लाम नहीं बनाया था। इस्लाम अल्लाह का दीन है जिसके वे पैगम्बर हैं और पैगम्बर भी आखिरी।

निगम साहब को दिक्कत इस बात को लेकर है कि अज़ान से उनकी नींद में बाधा आती है। मेरा मानना है कि मंदिर हो या मस्जिद, उसके लाउड स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि दूसरे आसानी से सुन सकें, उन्हें परेशानी न हो। आमतौर पर मस्जिदों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। मस्जिदों में लाउड स्पीकर की ध्वनि का स्तर साधारण ही होता है।

अब बात करते हैं नींद में रुकावट की। मुंबई में फज्र की प्रार्थना का समय सुबह 5.05 बजे है। यह ऐसा वक्त नहीं होता कि लोग गहरी नींद में सोए हों और प्रार्थना भी कितनी देर के लिए! मुश्किल से तीन-चार मिनट। माना कि निगम साहब इस दौरान गहरी नींद में सोए हों, लेकिन यह भी संभव है कि उसी दौरान उस इलाके में हजारों लोग ऐसे हों जिनके लिए अज़ान नींद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।

निगम साहब बहुत बड़े और दौलतमंद शख्स हैं। सुकून से नर्म बिस्तर पर सोते होंगे, लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी गरीब लोग हैं जो चटाई को बिछौना और हथेलियों को तकिया बनाकर सोते हैं। हर सुबह उनकी आंखें अज़ान सुनकर ही खुलती हैं। इसके बाद वे जल्दी-जल्दी अपने काम-धंधे में जुट जाते हैं। अज़ान उनके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। ऐसा अलार्म जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

इसलिए निगम साहब को मेरा सुझाव है कि वे अपने आलीशान बंगले के बेडरूम में साउंड प्रूफ सिस्टम लगवा लें, क्योंकि उनकी खुशी के लिए अज़ान का वक्त तो बदलने वाला नहीं।

चलते-चलते निगम साहब से मेरा एक सवाल। माना कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जमाने में बिजली नहीं थी, लाउड स्पीकर नहीं थे और भी कई चीजें नहीं थीं। वह जमाना और था, ये जमाना और है। लेकिन हुजूर, हमने सुना है कि भारत में संगीत की जड़ें सामवेद से जुड़ी हैं। संगीत का पहला सुर सा सामवेद ने दिया था।

शिव के डमरू, कृष्ण की मुरली, नटराज की मुद्राओं से होता हुआ संगीत आज आपके युग में पहुंचा है। मैं आपसे पूछता हूं, ये हवाई जहाज, स्मार्टफोन, गाड़ी, ट्विटर, फेसबुक वगैरह उस जमाने में तो नहीं थे। फिर आप इस जमाने में इन्हें क्यों ढो रहे हैं? जींस-टी शर्ट छोड़कर धोती पहना करें।

क्यों नहीं इन्हें छोड़कर उसी सदियों पुराने जमाने में लौट जाते? आज ही अपना स्मार्टफोन दीवार पर दे मारें या किसी गरीब को दान कर दें। बॉलीवुड के बड़े लोग रात को पार्टियां करें और दिनभर नींद में खोए रहें तो यह आम लोगों की जिम्मेदारी नहीं कि वे उनकी नींद की हिफाजत करें। कसूर अज़ान का नहीं, आपका है। कृपया वक्त पर सोया करें। शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –

Friday, April 14, 2017

With no apologies to Hindutva critics who have forgotten the ancient Hindu tradition:

With no apologies to Hindutva critics who have forgotten the ancient Hindu tradition:

A recent photograph of some Hindu Protesters demanding a ban on non-vegetarian food made me sit and take notice on vedaas. I believe that these protesters are ignorant of what their religion preaches.They are simply going against their own religious scriptures.

Let me quote some of the  Hindu scriptures:

*Manusmriti Chapter 5 verse 30:* "It is not sinful to eat meat of eatable animals,for God has created both the eaters and the eatables".

*Aapastanba Grishsutram (1/3/10):*
says,"The cow should be slaughtered on the arrival of a guest, on the occasion of 'Shraaddha of ancestors and on the occasion of a marriage".

*Rigveda (10/85/13):* declares "On the occasion of a girls marriage oxen and cows are slaughtered".

*Rigveda (6/17/1):* states that, "Indra used to eat the meat of cow, calf, horse and buffalo".

*Vashishta Dharmasutra (11/34):* says,If a Brahmin refuses to eat the meat offered to him on the occasion of ,'Shraaddha' he goes to hell".

*Hinduisms great propagator Swami Vivekaanand said thus:* "You will be surprised to know that according to ancient Hindu rite and rituals, a man cannot be a good Hindu who does not eat beef ".
(The complete works of Swami Vivekanand vol :3/5/36)

*"The book The history and culture of the indian people" published by Bharatiya vidya bhawan, bombay and edited by renowned historian R C Majumdar (vol 2 ,page 18 says)* This is said in the mahabharata that "king Ratindra used to kill 2000 other animals in addition to 2000 cows daily in order to give their meat in charity".

*Aadi shankaraachaarya commentary on Brahadaranyako panishad 6/4/18 says:'* Odaan' rice mixed with meat is called 'maansodan' on being asked whose meat it should be, he answers 'Uksha' is used for an ox, which is capable to produce semen..

Now who do you want to follow?

Religious books or the illiterate Sanghi street lotus? (Courtesy: Natraj Krishnan)