Sunday, November 04, 2018

ગુજરાતી સાહિત્યના અદભુત શેર

મારી હસ્તી મારી પાછળ એ રીતે વિસરાઈ ગઈ,
આંગળી જળમાંથી નીકળી ને જગા પૂરાઈ ગઈ.
- ઓજસ પાલનપુરી
અધીરો છે તને ઈશ્વર બધુંયે આપવા માટે,
તું ચમચી લઈને ઊભો છે દરિયો માગવા માટે?
- અનિલ ચાવડા
જીવ હજી તો જભ્ભામાં છે,
ફાટી ગઈ છે જાત કબીરા.
- ચંદ્રેશ મકવાણા
તારું કશું ન હોય તો છોડીને આવ તું,
તારું જ બધું હોય તો છોડી બતાવ તું.
- રાજેશ વ્યાસ 'મિસ્કીન'
આભમાં કે દરિયામાં તો એક પણ કેડી નથી,
અર્થ એનો એ નથી કે કોઈએ સફર ખેડી નથી.
- રાજેશ
હું ક્ષણોના મ્હેલમાં જાઉં અને,
કોક દરવાજો કરી દે બંધ તો!
- ચિનુ મોદી
જીવી શકું હું કઈ રીતે તમને સ્મર્યા વગર,
પાંપણ કદીયે રહી શકે મટકું ભર્યા વગર?
- મનહર મોદી
પાનખર વીતી છતાં ખરતાં રહે છે
પાંદડાને લાગી આવ્યું પાંદડાનું.
- ઉદયન ઠક્કર
શ્વાસને ઈસ્ત્રી કરી મેં સાચવી રાખ્યા હતા,
ક્યાંક અણધાર્યા પ્રસંગે જો જવાનું થાય તો!
- અનિલ ચાવડા
કેવા શુકનમાં પર્વતે આપી હશે વિદાય,
નીજ ઘરથી નીકળી નદી પાછી વળી નથી.
- જલન માતરી
ઘર સુધી તું આવવાની જીદ ન કર,
ઘર નથી નહીંતર હું ના પાડું તને?
- ખલીલ ધનતેજવી



મને સદભાગ્ય કે શબ્દો મળ્યા તારે નગર જાવા,
ચરણ લઈ દોડવા બેસું તો વરસોના વરસ લાગે.
- મનોજ ખંડેરિયા
ક્રોધ મારો જોઈને ડરશો નહીં,
પુષ્પના ડાઘા કદી પડતા નથી.
- ચિનુ મોદી
ભૂલ જો થાય મિત્રોની તો માફ કર,
જીભ કચડાય તો દાંત તોડાય નૈં.
- અનિલ ચાવડા
ચિંતા કરવાની મેં છોડી,
જેવું પાણી એવી હોડી.
- ભાવેશ ભટ્ટ
સિગારેટને રસ્તા ઉપર આ રીતથી ન ફેંક ભાઈ,
આ દેશમાં ચંપલ ઘણાં તળિયેથી કાણા હોય છે.
- ભાવિન ગોપાણી
અફસોસ કેટલાય મને આગવા મળ્યા,
ગાલીબને મારા શેર નથી વાંચવા મળ્યા.
- ભરત વીંઝુડા
સંપ માટીએ કર્યો તો ઈંટ થઈ,
ઈંટનું ટોળું મળ્યું તો ભીંત થઈ.
- અનિલ ચાવડા
શ્રદ્ધાનો હો વિષય ત્યાં પુરાવાની શી જરૂર?
કુરઆનમાં તો ક્યાંય પયંબરની સહી નથી.
- જલન માતરી
બધો આધાર છે એના જતી વેળાના જોવા પર,
મિલનમાંથી નથી મળતા મહોબતના પુરાવાઓ.
*l- મરીઝ
જિંદગીને જીવવાની ફિલસુફી સમજી લીધી,
જે ખુશી આવી જીવનમાં આખરી સમજી લીધી.
- મરીઝ
કઈ તરકીબથી પથ્થરની કેદ તોડી છે ?
કૂંપળની પાસે શું કુમળી કોઈ હથોડી છે ?
- ઉદયન ઠક્કર
હું મંદિરમાં આવ્યો અને દ્વાર બોલ્યું,
પગરખાં નહીં બસ અભરખા ઉતારો.
- ગૌરાંગ ઠાકર
જત જણાવવાનું તને કે છે અજબ વાતાવરણ,
એક ક્ષણ તું હોય છે ને એક ક્ષણ તારું સ્મરણ.
- રાજેન્દ્ર શુક્લ
તમને સમય નથી અને મારો સમય નથી,
કોણે કહ્યું કે આપણી વચ્ચે પ્રણય નથી.
- બાપુભાઈ ગઢવી
રડ્યા ‘બેફામ’ સૌ મારા મરણ પર એજ કારણથી,
હતો મારો જ એ અવસર ને મારી હાજરી નહોતી.
- બરકત વિરાણી ‘બેફામ’
તફાવત એ જ છે,તારા અને મારા વિષે, જાહિદ!
વિચારીને તું જીવે છે, હું જીવીને વિચારું છું
- અમૃત ઘાયલ
જીવનની સમી સાંજે મારે જખ્મોની યાદી જોવી’તી,
બહુ ઓછાં પાનાં જોઈ શકયો બહુ અંગત અંગત નામ હતાં.
- સૅફ પાલનપુરી
તું કહે છે અશ્રુ ચાલ્યા જાય છે,
હું કહું છું જિંદગી ધોવાય છે.
– શયદા
વતનની ધૂળથી માથુ ભરી લઉં ‘આદિલ’,
અરે આ ધૂળ પછી ઉમ્રભર મળે ન મળે.
- આદિલ મન્સૂરી
બસ, દુર્દશાનો એટલો આભાર હોય છે,
જેને મળું છું, મુજથી સમજદાર હોય છે.
- મરીઝ
જિંદગીના રસને પીવામાં કરો જલ્દી ‘મરીઝ’,
એક તો ઓછી મદિરા છે, ને ગળતું જામ છે.
- મરીઝ
સમયની શોધ થઈ તેની આગલી સાંજે
મેં ઈંતજારને શોધ્યો હતો ખબર છે તને?
- મુકુલ ચોક્સી
હસ્તરેખા જોઈને સૂરજની કૂકડાએ કહ્યું,
આપના પ્રારબ્ધમાં બહુ ચડ-ઉતર દેખાય છે.
- ઉદયન ઠક્કર
મોત વેળાની આ ઐયાશી નથી ગમતી ‘મરીઝ’,
હું પથારી પર રહું ને આખું ઘર જાગ્યા કરે.
– મરીઝ

Tuesday, April 18, 2017

शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

राजीव शर्मा का सोनू निगम को जवाब: शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

April 17, 2017

जब गर्मियों का मौसम आता है तो मैं रात को खुले आसमान के नीचे सोना पसंद करता हूं। मीलों-मीलों तक फैला आसमान, उसमें चमकते ढेरों सितारे और खूबसूरत चांद देखकर मैं हर रोज सोचता हूं कि यह कायनात इतनी बड़ी है तो इसे बनाने वाला कितना बड़ा होगा! उसकी ताकत कितनी होगी! यही सोचते कब आंख लग जाती है, मालूम ही नहीं होता।

सुबह सूरज की रोशनी मुझे मजबूर कर देती है कि आंखें खोलूं। सूरज हर रोज अपने ठीक वक्त पर आ जाता है। अगर सूर्योदय के बाद भी मैं सोता रहूं और यह सोचकर दिल को दिलासा देता रहूं कि सो जा राजीव, अभी तो रात बहुत बाकी है! तो इसमें दोष मेरा है, सूरज का नहीं। वह हर रोज अपने वक्त पर आता रहेगा, अपने रास्ते चलता रहेगा। उसे परवाह नहीं कि किसकी नींद टूटती है और किसकी जारी रहती है। उसे आपके और मेरे हुक्म की जरूरत नहीं है।

मुझे याद है, आज से करीब 20 साल पहले हर सुबह मेरी आंखें अज़ान सुनकर खुलती थीं। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। सुबह-सुबह अज़ान दिलो-दिमाग को ऊर्जा से भर देती। अज़ान के बाद आरती की बारी आती। मंदिर से धूप और दीपक की सुगंध आरती को और मधुर एवं असरदार बना देती। मेरा न कभी आरती से वैर रहा और न ही अज़ान से कोई दुश्मनी। मुझे दोनों ही बहुत प्रिय हैं। अज़ान मेरे दिल का सुकून और आरती मेरे मन की ताकत।

रोज की तरह आज सुबह जब मैं नींद से उठा तो एक खास खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। संगीत की दुनिया के एक बहुत बड़े नाम सोनू निगम अज़ान से सख्त खफा हैं। उनका कहना है कि सुबह-सुबह उनकी नींद खराब न की जाए। निगम साहब ने आगे फरमाया है कि यह तो साफ-साफ गुंडागर्दी है। उन्हीं के शब्दों में, जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो उस दौर में बिजली नहीं थी। फिर यह शोर-शराबा क्यों?

सोनू निगम ने जो कहा, ये उनके निजी विचार हैं। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन वे कई गलतियां कर गए। पहली बात तो यह कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस्लाम नहीं बनाया था। इस्लाम अल्लाह का दीन है जिसके वे पैगम्बर हैं और पैगम्बर भी आखिरी।

निगम साहब को दिक्कत इस बात को लेकर है कि अज़ान से उनकी नींद में बाधा आती है। मेरा मानना है कि मंदिर हो या मस्जिद, उसके लाउड स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि दूसरे आसानी से सुन सकें, उन्हें परेशानी न हो। आमतौर पर मस्जिदों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। मस्जिदों में लाउड स्पीकर की ध्वनि का स्तर साधारण ही होता है।

अब बात करते हैं नींद में रुकावट की। मुंबई में फज्र की प्रार्थना का समय सुबह 5.05 बजे है। यह ऐसा वक्त नहीं होता कि लोग गहरी नींद में सोए हों और प्रार्थना भी कितनी देर के लिए! मुश्किल से तीन-चार मिनट। माना कि निगम साहब इस दौरान गहरी नींद में सोए हों, लेकिन यह भी संभव है कि उसी दौरान उस इलाके में हजारों लोग ऐसे हों जिनके लिए अज़ान नींद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।

निगम साहब बहुत बड़े और दौलतमंद शख्स हैं। सुकून से नर्म बिस्तर पर सोते होंगे, लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी गरीब लोग हैं जो चटाई को बिछौना और हथेलियों को तकिया बनाकर सोते हैं। हर सुबह उनकी आंखें अज़ान सुनकर ही खुलती हैं। इसके बाद वे जल्दी-जल्दी अपने काम-धंधे में जुट जाते हैं। अज़ान उनके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। ऐसा अलार्म जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

इसलिए निगम साहब को मेरा सुझाव है कि वे अपने आलीशान बंगले के बेडरूम में साउंड प्रूफ सिस्टम लगवा लें, क्योंकि उनकी खुशी के लिए अज़ान का वक्त तो बदलने वाला नहीं।

चलते-चलते निगम साहब से मेरा एक सवाल। माना कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जमाने में बिजली नहीं थी, लाउड स्पीकर नहीं थे और भी कई चीजें नहीं थीं। वह जमाना और था, ये जमाना और है। लेकिन हुजूर, हमने सुना है कि भारत में संगीत की जड़ें सामवेद से जुड़ी हैं। संगीत का पहला सुर सा सामवेद ने दिया था।

शिव के डमरू, कृष्ण की मुरली, नटराज की मुद्राओं से होता हुआ संगीत आज आपके युग में पहुंचा है। मैं आपसे पूछता हूं, ये हवाई जहाज, स्मार्टफोन, गाड़ी, ट्विटर, फेसबुक वगैरह उस जमाने में तो नहीं थे। फिर आप इस जमाने में इन्हें क्यों ढो रहे हैं? जींस-टी शर्ट छोड़कर धोती पहना करें।

क्यों नहीं इन्हें छोड़कर उसी सदियों पुराने जमाने में लौट जाते? आज ही अपना स्मार्टफोन दीवार पर दे मारें या किसी गरीब को दान कर दें। बॉलीवुड के बड़े लोग रात को पार्टियां करें और दिनभर नींद में खोए रहें तो यह आम लोगों की जिम्मेदारी नहीं कि वे उनकी नींद की हिफाजत करें। कसूर अज़ान का नहीं, आपका है। कृपया वक्त पर सोया करें। शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –

शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

राजीव शर्मा का सोनू निगम को जवाब: शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

April 17, 2017

जब गर्मियों का मौसम आता है तो मैं रात को खुले आसमान के नीचे सोना पसंद करता हूं। मीलों-मीलों तक फैला आसमान, उसमें चमकते ढेरों सितारे और खूबसूरत चांद देखकर मैं हर रोज सोचता हूं कि यह कायनात इतनी बड़ी है तो इसे बनाने वाला कितना बड़ा होगा! उसकी ताकत कितनी होगी! यही सोचते कब आंख लग जाती है, मालूम ही नहीं होता।

सुबह सूरज की रोशनी मुझे मजबूर कर देती है कि आंखें खोलूं। सूरज हर रोज अपने ठीक वक्त पर आ जाता है। अगर सूर्योदय के बाद भी मैं सोता रहूं और यह सोचकर दिल को दिलासा देता रहूं कि सो जा राजीव, अभी तो रात बहुत बाकी है! तो इसमें दोष मेरा है, सूरज का नहीं। वह हर रोज अपने वक्त पर आता रहेगा, अपने रास्ते चलता रहेगा। उसे परवाह नहीं कि किसकी नींद टूटती है और किसकी जारी रहती है। उसे आपके और मेरे हुक्म की जरूरत नहीं है।

मुझे याद है, आज से करीब 20 साल पहले हर सुबह मेरी आंखें अज़ान सुनकर खुलती थीं। यह सिलसिला करीब एक साल तक चला। सुबह-सुबह अज़ान दिलो-दिमाग को ऊर्जा से भर देती। अज़ान के बाद आरती की बारी आती। मंदिर से धूप और दीपक की सुगंध आरती को और मधुर एवं असरदार बना देती। मेरा न कभी आरती से वैर रहा और न ही अज़ान से कोई दुश्मनी। मुझे दोनों ही बहुत प्रिय हैं। अज़ान मेरे दिल का सुकून और आरती मेरे मन की ताकत।

रोज की तरह आज सुबह जब मैं नींद से उठा तो एक खास खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। संगीत की दुनिया के एक बहुत बड़े नाम सोनू निगम अज़ान से सख्त खफा हैं। उनका कहना है कि सुबह-सुबह उनकी नींद खराब न की जाए। निगम साहब ने आगे फरमाया है कि यह तो साफ-साफ गुंडागर्दी है। उन्हीं के शब्दों में, जब मुहम्मद ने इस्लाम बनाया तो उस दौर में बिजली नहीं थी। फिर यह शोर-शराबा क्यों?

सोनू निगम ने जो कहा, ये उनके निजी विचार हैं। लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है लेकिन वे कई गलतियां कर गए। पहली बात तो यह कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) ने इस्लाम नहीं बनाया था। इस्लाम अल्लाह का दीन है जिसके वे पैगम्बर हैं और पैगम्बर भी आखिरी।

निगम साहब को दिक्कत इस बात को लेकर है कि अज़ान से उनकी नींद में बाधा आती है। मेरा मानना है कि मंदिर हो या मस्जिद, उसके लाउड स्पीकर की आवाज सिर्फ इतनी होनी चाहिए कि दूसरे आसानी से सुन सकें, उन्हें परेशानी न हो। आमतौर पर मस्जिदों में इस बात का खास ध्यान रखा जाता है। मस्जिदों में लाउड स्पीकर की ध्वनि का स्तर साधारण ही होता है।

अब बात करते हैं नींद में रुकावट की। मुंबई में फज्र की प्रार्थना का समय सुबह 5.05 बजे है। यह ऐसा वक्त नहीं होता कि लोग गहरी नींद में सोए हों और प्रार्थना भी कितनी देर के लिए! मुश्किल से तीन-चार मिनट। माना कि निगम साहब इस दौरान गहरी नींद में सोए हों, लेकिन यह भी संभव है कि उसी दौरान उस इलाके में हजारों लोग ऐसे हों जिनके लिए अज़ान नींद से ज्यादा महत्वपूर्ण हो।

निगम साहब बहुत बड़े और दौलतमंद शख्स हैं। सुकून से नर्म बिस्तर पर सोते होंगे, लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी गरीब लोग हैं जो चटाई को बिछौना और हथेलियों को तकिया बनाकर सोते हैं। हर सुबह उनकी आंखें अज़ान सुनकर ही खुलती हैं। इसके बाद वे जल्दी-जल्दी अपने काम-धंधे में जुट जाते हैं। अज़ान उनके लिए किसी अलार्म से कम नहीं है। ऐसा अलार्म जिस पर भरोसा किया जा सकता है।

इसलिए निगम साहब को मेरा सुझाव है कि वे अपने आलीशान बंगले के बेडरूम में साउंड प्रूफ सिस्टम लगवा लें, क्योंकि उनकी खुशी के लिए अज़ान का वक्त तो बदलने वाला नहीं।

चलते-चलते निगम साहब से मेरा एक सवाल। माना कि हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के जमाने में बिजली नहीं थी, लाउड स्पीकर नहीं थे और भी कई चीजें नहीं थीं। वह जमाना और था, ये जमाना और है। लेकिन हुजूर, हमने सुना है कि भारत में संगीत की जड़ें सामवेद से जुड़ी हैं। संगीत का पहला सुर सा सामवेद ने दिया था।

शिव के डमरू, कृष्ण की मुरली, नटराज की मुद्राओं से होता हुआ संगीत आज आपके युग में पहुंचा है। मैं आपसे पूछता हूं, ये हवाई जहाज, स्मार्टफोन, गाड़ी, ट्विटर, फेसबुक वगैरह उस जमाने में तो नहीं थे। फिर आप इस जमाने में इन्हें क्यों ढो रहे हैं? जींस-टी शर्ट छोड़कर धोती पहना करें।

क्यों नहीं इन्हें छोड़कर उसी सदियों पुराने जमाने में लौट जाते? आज ही अपना स्मार्टफोन दीवार पर दे मारें या किसी गरीब को दान कर दें। बॉलीवुड के बड़े लोग रात को पार्टियां करें और दिनभर नींद में खोए रहें तो यह आम लोगों की जिम्मेदारी नहीं कि वे उनकी नींद की हिफाजत करें। कसूर अज़ान का नहीं, आपका है। कृपया वक्त पर सोया करें। शराब के नशे में सोने वाले क्या जानें अज़ान क्या है!

– राजीव शर्मा (कोलसिया) –

Friday, April 14, 2017

With no apologies to Hindutva critics who have forgotten the ancient Hindu tradition:

With no apologies to Hindutva critics who have forgotten the ancient Hindu tradition:

A recent photograph of some Hindu Protesters demanding a ban on non-vegetarian food made me sit and take notice on vedaas. I believe that these protesters are ignorant of what their religion preaches.They are simply going against their own religious scriptures.

Let me quote some of the  Hindu scriptures:

*Manusmriti Chapter 5 verse 30:* "It is not sinful to eat meat of eatable animals,for God has created both the eaters and the eatables".

*Aapastanba Grishsutram (1/3/10):*
says,"The cow should be slaughtered on the arrival of a guest, on the occasion of 'Shraaddha of ancestors and on the occasion of a marriage".

*Rigveda (10/85/13):* declares "On the occasion of a girls marriage oxen and cows are slaughtered".

*Rigveda (6/17/1):* states that, "Indra used to eat the meat of cow, calf, horse and buffalo".

*Vashishta Dharmasutra (11/34):* says,If a Brahmin refuses to eat the meat offered to him on the occasion of ,'Shraaddha' he goes to hell".

*Hinduisms great propagator Swami Vivekaanand said thus:* "You will be surprised to know that according to ancient Hindu rite and rituals, a man cannot be a good Hindu who does not eat beef ".
(The complete works of Swami Vivekanand vol :3/5/36)

*"The book The history and culture of the indian people" published by Bharatiya vidya bhawan, bombay and edited by renowned historian R C Majumdar (vol 2 ,page 18 says)* This is said in the mahabharata that "king Ratindra used to kill 2000 other animals in addition to 2000 cows daily in order to give their meat in charity".

*Aadi shankaraachaarya commentary on Brahadaranyako panishad 6/4/18 says:'* Odaan' rice mixed with meat is called 'maansodan' on being asked whose meat it should be, he answers 'Uksha' is used for an ox, which is capable to produce semen..

Now who do you want to follow?

Religious books or the illiterate Sanghi street lotus? (Courtesy: Natraj Krishnan)

Wednesday, March 01, 2017

गुरमेहर कौर ने ऐसा क्या कर दिया ?

गुरमेहर कौर ने ऐसा क्या कर दिया
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https://youtu.be/G4a54v-x7M0

छह महीने में ट्विटर से 30 लाख रूपये कमाने वाले सहवाग को ऐसे ट्वीट करने ही पड़ते हैं जो वायरल हो सकें. इसीलिए वे अपना धंधा चमकाने के लिए एक कारगिल शहीद की बेटी के शांति संदेश को तोड़-मरोड़कर नफरत फैलाने से भी नहीं चूके. लेकिन आप लोग, जो सहवाग का ट्वीट पढ़कर नफरती चिंटू बने जा रहे हो, गुरमेहर कौर का संदेश पूरा देख लो.....
*पिछले साल उन्होंने एक विडियो बनाया था जिसमें कुल 36 स्लाइड्स थी*:➖
1: Hi.

2: मेरा नाम गुरमेहर कौर है.

3: मैं जालंधर की रहने वाली हूं.

4: ये मेरे पापा कैप्टेन मंदीप सिंह हैं. (कैप्टेन मंदीप सिंह की तस्वीर दिखाते हुए.)

5: वे 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए थे.

6: जब उनकी मौत हुई तब मैं सिर्फ दो साल की थी. मेरे पास उनकी बहुत कम यादें हैं.

7: मेरी अधिकतर यादें यही हैं कि पिता का न होना कैसा होता है.

8: मुझे यह भी याद है कि मैं पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से कितनी नफरत करती थी. क्योंकि उन्होंने मेरे पापा को मरा था.

9: मैं मुलसमानों से भी नफरत करती थी क्योंकि मुझे लगता था कि सभी मुसलमान पाकिस्तानी होते हैं.

10. जब मैं 6 साल की थी, मैंने बुर्का पहने एक औरत पर हमला करने की कोशिश की थी.

11: क्योंकि कुछ अजीब कारणों के चलते मुझे लगा कि वह भी मेरे पापा की मौत की जिम्मेदार है.

12: तब मेरी मां ने मुझे संभाला और मुझे समझाया कि..

13: पाकिस्तान ने मेरे पापा को नहीं मारा, जंग ने उन्हें मारा है.

14: यह समझने में मुझे समय लगा. लेकिन अब मैंने अपनी नफरत को त्यागना सीख लिया है.

15: यह आसान नहीं था, लेकिन यह मुश्किल भी नहीं है.

16: अगर मैं ये कर सकती हूं तो आप भी कर सकते हैं.

17: आज मैं भी एक सिपाही हूं, बिलकुल अपने पापा की तरह.

18: मैं हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के लिए लड़ रही हूं.

19: क्योंकि अगर हमारे बीच जंग नहीं होती, तो मेरे पापा आज यहां होते.

20: मैं यह विडियो इसलिए बना रही हूं क्योंकि मैं चाहती हूं कि दोनों देशों की सरकारें अब दिखावा बंद करें.

21: और समस्या को सुलझाएं.

22: अगर फ्रांस और जर्मनी दो विश्व युद्ध लड़ने के बाद भी दोस्त बन सकते हैं

23: अगर जापान और अमरीका अपना इतिहास पीछे छोड़ते हुए एक साथ प्रगति के लिए काम कर सकते हैं

24: तो फिर हम क्यों नहीं?

25: अधिकतर हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी शांति चाहते हैं, युद्ध नहीं.

26: मैं दोनों देशों की नेतृत्व क्षमताओं पर सवाल कर रही हूं.

27: हम थर्ड वर्ल्ड का नेतृत्व लेकर फर्स्ट वर्ल्ड देश बनने का सपना नहीं देख सकते.

28: प्लीज, अपने प्रयासों में सुधार करें, एक-दूसरे से बात करें और यह काम पूरा करें.

29: राष्ट्र द्वारा प्रायोजित आतंकवाद बहुत हो चुका.

30: राष्ट्र द्वारा प्रायोजित जासूस बहुत हो चुके.

31: राष्ट्र द्वारा प्रायोजित नफरत अब बहुत हो चुकी.

32: बॉर्डर के दोनों तरफ बहुत लोग मारे जा चुके हैं.

33: अब बहुत हो चुका है.

34: मैं एक ऐसी दुनिया में रहना चाहती हूं जहां और कोई गुरमेहर कौर न हो जो अपने पापा को मिस करे.

35: मैं अकेली नहीं हूं, मेरे जैसे कई लोग हैं.

36: # Profile for Peace.

*4 मिनट 23 सेकंड के इस विडियो की कुल 36 स्लाइड्स में से कुछ नफरती चिंटुओं ने सिर्फ 13वीं स्लाइड को वायरल कर दिया. जिन्हें युद्ध और शहीदों की लाशों पर राजनीति चमकानी है, वे ऐसा करेंगे ही. सहवाग जैसे लोग, जिन्हें ऐसे मुद्दों से पैसा बनाना है, वे भी ऐसा करेंगे ही. लेकिन आप लोग तय कीजिये कि आप गुरमेहर कौर के साथ हैं, या उन्हें जान से मारने और बलात्कार की धमकियां देने वालों के साथ हैं ?

Tuesday, November 22, 2016

Was he a Muslim?

```In the HISTORY of the world, who has KILLED maximum INNOCENT
human beings?

1) "Hitler"
Do you know who he was?

He was a Christian, but media will never call Christians terrorists.

2) "Joseph Stalin called as Uncle Joe".

He has killed 20 million human beings including 14.5 million were starved to death.

Was he a Muslim?

3) "Mao Tse Tsung (China)"

He has killed 14 to 20 million human beings.

Was he a Muslim?

4) "Benito Mussolini (Italy)"

He has killed 400 thousand human beings.

Was he a Muslim?

5) "Ashoka" In Kalinga Battle

He has killed 100 thousand human beings.

Was he a Muslim?

6) Embargo put by George Bush in Iraq,

1/2 million children
has been killed in Iraq alone!!! Imagine these people are never called terrorists by the media.

Was he a Muslim?

Today the majority of the non-muslims are afraid by hearing the words "JIHAD".

Jihad is an Arabic word which comes from root Arabic word "JAHADA" which means "TO STRIVE" or "TO STRUGGLE" against evil and for justice. It does not
mean killing innocents.

The difference is we stand against evil, not with evil".

Is ISLAM really the problem?

1. The First World War, 17 million dead
(caused by non-Muslim).

2. The Second World War, 50-55 million dead (caused by non-Muslim).

3. Nagasaki atomic bombs 200000 dead
(caused by non-Muslim).

4. The War in Vietnam, over 5 million dead (caused by non-Muslim).

5. The War in Bosnia/Kosovo, over 5,00,000 dead (caused by non-Muslim).

6. The War in Iraq (so far) 12,000,000 deaths
(caused by non-Muslim).

7. Afghanistan, Iraq, Palestine, Burma (monks!) etc ongoing..(caused by non-Muslim).

8. In Cambodia 1975-1979, almost 3 million deaths (caused by non-Muslim).

"MUSLIMS ARE NOT TERRORISTS
AND
TERRORISTS ARE NOT MUSLIMS."

AND ABOVE ALL NEITHER OF THE WEAPONS OF MASS DESTRUCTION AS WELL AS ANY ASSAULT WEAPONS ARE INVENTED BY MUSLIMS.
AND ABOVE ALL EVEN THE ARMS GIVEN AND SUPPLIED TO THE  SO CALLED MUSLIM TERRORIST ARE NOT BY ANY  ISLAMIC INSTITUTE.
TALIBAN AS WELL AS ISIS IS ALL CREATION OF WEST.

These double standards must be broadcast.

Tuesday, November 15, 2016

भारत पिछले ६० सालों में

मैं कॉंग्रेसी नहीं हूँ ।
न ही मोदी भक्त हूँ ।
मैं अपने देश से प्यार करता हूँ।

भारत ने पिछले ६० सालों में तरक्की भी बहुत की है और भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों ने कई इतिहास रच दिए हैं जिसकी वजह से भारत आज एशिया की दूसरी सब से बड़ी ताकत है।

• जब मोदी  पैदा भी नहीं हुए थे---
तब तक देश पाकिस्तान से एक युद्ध जीत चुका था..

• मोदी जब बोलना भी नहीं सीखे थे,
तब तक भारत दुनिया का सर्व श्रेष्ठ संविधान बना चुका था...

• मोदी जब घुटनों के बल चलना सीख रहे थे,
तब तक भारत एशियाई खेलों की मेजबानी कर चुका था...

• मोदी जब गुल्ली डंडा खेलते थे...
भारत में भाखड़ा और रिहंद जैसे बाँध बन चुके थे...

• मोदी जब स्कूल में किताबें पलट रहे थे
तब देश भामा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर का उद्घाटन कर चुका था..

• मोदी जब लालटेन जलाना सीख रहे थे
देश में तारापुर परमाणु बिज़ली घर शुरू हो चुका था...

• मोदी को कपड़ा पहनना नहीं आया था...
जब देश में कई दर्जन AIIMS, IIT, IIMS और सैकड़ों विश्वविद्यालय खुल चुके थे..

• मोदी जब अपनी नाक पोंछना भी नहीं सीखे थे तब नेहरु ने नवरत्न कम्पनियाँ स्थापित कर दी थी...

• मोदी पाकिस्तान के खिलाफ एक के बदले दस सिर लाने की बात करते हैं आज, लेकिन खुद नवाज शरीफ का जन्मदिन मनाते हैं

जबकि मोदी के प्रधानमंत्री बनने के कईसालों पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को लाहौर के अंदर तक घुसकर मारा था और लाहौर पर कब्जा कर लिया था।

• मोदी जब स्कूल में इतिहास पढ़ रहे थे
पंडित नेहरु पुर्तगाल से जीत कर गोवा को भारत में मिला चुके थे...

• मोदी की अक्कल दाढ आने से पहले...
नेहरु जी ने ISRO (Indian Space Research Organization) की शुरुआत कर दी थी...

• मोदी की पूरी दाढ़ी मूँछ उगने से पहले,
भारत में श्वेत क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी..

• मोदी  जब हाफ पैन्ट पहन रहे थे..
देश में उद्योगों का जाल बिछ चुका था..

• मोदी जब शाखा में लाठियां भांज रहे थे...
इंदिरा जी पाकिस्तान के दो टुकड़े कर चुकी थी, पाकिस्तान १ लाख सैनिकों और कमांडरो के साथ भारत को सरेंडर कर चुका था।

• मोदी जब अर्थशास्त्र का abc नहीं जानते थे (वैसे अब कौन सा जानते हैं, सीमेंट बोरी 120/-), तब भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो चूका था..

• मोदी जब कानूनी रूप से वयस्क हुए,
तब तक इंदिरा जी ने सिक्किम को देश में जोड़ लिया था....

• मोदी जब अपनी पत्नी को छोड़ कर घर से भागे थे तब इंदिरा जी ने पहला परमाणु विस्फोट कर लिया था ...

• जब मोदी अपनी माँ को बिना बताये घर से निकल लिए थे
तब तक देश अनाज के बारे में आत्म निर्भर हो गया था.

• मोदी को जब सायकल चला रहे थे ...
भारत हवाई जहाज और हेलीकाप्टर बनाने लगा था...

• मोदी को जब बोलना नहीं आता था
राजीव गाँधी ने रोज एक टीवी टावर का उद्घाटन करके देश के घर घर में टीवी पहुंचा दिया था।

• मोदी जब संघ कार्यालय में झाड़ू लगाते थे,
तब देश में सुपर कम्प्यूटर, टेलीविजन और सुचना क्रांति ( Information Technology) पूरे भारत में स्थापित हो चुका था..

• मोदी जब गुजरात में केशुभाई पटेल और शंकर सिंह वाघेला के ख़िलाफ साज़िशें रच रहे थे,
तब देश में आर्थिक उदारीकरण मनमोहन सिंह जी ला चुके थे..

• जब मोदी प्रधान मंत्री पद की शपथ ले रहे थे
तब तक भारत सर्वाधिक विदेशी मुद्रा के कोष वाले प्रथम १० राष्ट्रों में शामिल हो चुका था

• इनके अलावा..
चन्द्र यान,
मंगल मिशन ,
GSLV,
मेट्रो,
मोनो रेल,
अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे,
न्यूक्लियर पनडुब्बी,
ढ़ेरों मिसाइल,पृथ्वी, अग्नि, नाग
दर्जनों परमाणु सयंत्र,
चेतक हेलीकाप्टर, मिग
तेजस, ड्रोन, अर्जुन टैंक, धनुष तोप,
मिसाइल युक्त विमान,
आई एन एस विक्रांत
विमान वाहक पोत......

ये सब उपलब्धियां देश ने मोदी  के प्रधानमंत्री बनने के पहले हासिल कर ली थी.

अपनी आँखें खोलो..
जानकारी से मुँह मत मोड़िये।
किसी भी नेता को अपना भगवान मत बनाइये।

Thursday, October 27, 2016

મુસ્લિમ પર્સનલ લો અને સમાન સિવિલ કોડ

મુસ્લિમ પર્સનલ લો અને સમાન સિવિલ કોડ
       આપણે સહુ જાણીએ છીએ કે સદીઓ સુધી ભારત ઉપર મુસલમાન બાદશાહોનું શાસન રહયું છે. આ બાદશાહો પોતે મુસલમાન હોવા છતાં પ્રજાલક્ષી બાબતોમાં સાચા અર્થમાં સેકયુલર હતા, એટલે એમણે ભારતના દરેક ધર્મના લોકોને એમના ધર્મ પ્રમાણે અનુરસણ અને આચરણની છુટ આપી હતી. મુસ્લિમ શાસકો પછી અંગ્રેજોનું શાસન આવ્યું. ર૦૦ વરસના અંગ્રેજોના શાસનકાળમાં ભારતમાં જે પરિવર્તનો આવ્યા, અને અંગ્રેજોએ જે પ્રમાણે ભારતને આથિર્ક, સામાજિક અને ધાર્મિક ક્ષેત્રે બરબાદ કયુઁ, એના મુકાબલામાં મુસલમાન બાદશાહોના ૭૦૦ વરસના શાસનને મૂકીને જોવામાં આવે તો સમજમાં આવી જશે કે ભારતીય પ્રજા માટે મુસલમાન બાદશાહો મુસ્લિમ હોવા છતાં કેટલા ઉદાર હતા.
      અંગ્રેજોએ સત્તા ઉપર કબજો કર્યો તો સુશાસનના નામે ધીરે ધીરે પોતાના કાયદાઓ થોપવા માંડયા. પણ આ બધું એકદમ શકય ન હતું, એટલે શાસન અને સરકારના કાયદાઓ (CRIMINAL CODE) છોડીને સામાજિક વહેવારોના કાયદાઓમાં મુસલમાનો તેમજ હિંદુઓ વગેરેને બાકાત રાખ્યા. એટલે કે કૌટુંબિક અને સામાજિક વહેવારોને લગતા મુસ્લિમ કાયદાઓ (CIVIL CODE) બહાલ રાખ્યા અને કોટુંબિક બાબતોને લગતા મુસલમાનોના કેસોના નિકાલ માટે અંગ્રેજો તરફથી કાઝી નિયુકત કરવામાં આવ્યા. હિંદુઓ માટે અલાયદી વ્યવસ્થા કરવામાં આવી. અલબત્ત અંગ્રેજો તરફથી ધીરે ધીરે કાઝી અને એના તાબા હેઠળ આવતી બાબતોને સિમિત કરવાનું ષડયંત્ર ચાલતું રહયું. બીÒ તરફ મુસલમાનો પણ કમથી કમ પોતાના સામાજિક, કૌટુંબિક અને ધાર્મિક ઓળખને લગતી બાબતોને સાચવી રાખવા અને કાયદા - કાનૂનમાં એનું સ્થાન બનાવી રાખવા પ્રયત્નો કરતા રહેતા હતા. છેલ્લે ૧૯૩૭ ઈ. માં શરીઅત એકટ પાસ કરવામાં આવ્યો. જે અનુસાર વારસા – વહેંચણી,  નિકાહ,  તલાક,  ખુલઅ, મહેર, અમાનત, અવકાફ, બખ્શીશ, વસીય્યત, કોઈને દત્તક લેવા... જેવી બાબતોમાં મુસલમાનોના કેસો ઇસ્લામી શરીઅત મુજબ જ હલ કરવાનો કાયદો બનાવવામાં આવ્યો.
ભારતના આઝાદ થયા પછી (CRIMINAL CODE) તો બધા જ ભારતીયો માટે સમાન રાખવામાં આવ્યો. એમાં મુસલમાનો ઉપર પણ આ કાયદો સમાન રીતે લાગુ પડે છે. અલબત્ત કૌટુંબિક બાબતોમાં એ જ શરીઅત એકટ લગભગ બંધારણમાં દ્વારા ભારતીય મુસલમાનો માટે બહાલ રાખવા આવ્યો. અલબત્ત એક બાબત રહી ગઈ. અવી કોઈ કલમ કે કાયદો ઉમેરવામાં ન આવ્યો કે ઉપરોકત બાબતોને લગતો બે મુસલમાન પક્ષોનો કેસ આવે તો જજ સાહેબે મુસ્લિમ પર્સનલ લો મુજબ જ ફેસલો આપવાનો રહેશે. એટલે આ જ સુધી કોર્ટ કાર્યવાહીમાં જજ સાહેબો એમની મરÒ મુજબ મુસલમાનોની કૌટુંબિક બાબતોને લગતો કેસ હોય તો પણ અને ભારતીય કાયદાઓમાં એને લગતા મુસ્લિમ લોને સ્થાન હોવા છતાં સામાન્ય નિયમો મુજબ કાર્યવાહી ચલાવે છે અને ફેસલા કરે છે.
        અફસોસ સાથે કહેવું પડે છે કે અમને યાદ નથી કે આઝાદી પછીથી આજ સુધી આ બાબતે કોઈ મુસ્લિમ સંસ્થા અથવા વ્યકિતએ માંગણી કરી હોય કે જજ સાહેબોને બાધ્ય કરવા માટે કોઈ ઠરાવ પાસ કરવામાં આવે. સ્પષ્ટ છે કે આવા કોઈ કાયદા કે બંધન વગર બંધારણ દ્વારા મુસ્લિમ પર્સનલ લોને જે સ્થાન આપવામાં આવ્યું છે, એનો કોઈ ફાયદો થવાનો નથી. જયારે જયારે સમાન સિવિલ કોડનો હાઉ ઉભો કરવામાં આવે છે ત્યારે આપણે એને બચાવવાના નામે લાખો ઉધમ પછાડા કરીએ છીએ, પણ કરવાનું આ મહત્વનું કામ આપણે કરતા નથી. અલ્લાહ તઆલા મુસ્લિમ નેતાગીરીને સાચી સમજ આપે.
      આઝાદી પછી જયારે બંધારણની રચના અને સંપાદન થઈ રહયું હતું ત્યારે બંધારણના શરૂમાં બંધારણના રચિયતાઓએ અમુક માર્ગદર્શન સિદ્ઘાંતો પણ લખ્યા છે. જેમાં શિક્ષણ, રોજગાર, સલામતી, ધાર્મિક સ્વતંત્રતા, વગેરેના બુનિયાદી અધિકારો લોકોને આપવા માટે સરકારોને અનુરોધ કરવામાં આવ્યો છે. શિક્ષણ, રોજગાર, સ્વાસ્થય સેવાઓ, દારૂબંધી જેવી ઘણી બાબતો સઘળા નાગરિકો સુધી પહોંચતી ન હતી, અને એકદમ બધાને આ સુવિધાઓ ઉપલબ્ધ કરાવવી સરકારો માટે શકય ન હતી એટલે કહેવામાં આવ્યું કે સરકારો આ માટે પ્રયાસો કરશે. આ બધામાં એક બાબત સમાન કાયદાની એટલે કોમન સિવિલ કોડ માટે પ્રયાસ કરવાનું પણ સરકારોને સુચવવામાં આવ્યું. માર્ગદર્શન સિદ્ઘાંતની આ કલમ જયારે બંધારણ સભામાં ચર્ચામાં આવી તો બંધારણ સભામાં દેશ અને મુસલમાનોનું પ્રતિનિધિત્વ કરતા શ્રી મુહમ્મદ ઇસ્માઈલ, શ્રી નઝીરુદ્દીન અહમદ, શ્રી મહેબૂબ અલી, શ્રી બી. પોકર બહાદુર વગેરે એના ઉપર વાંધો ઉઠાવ્યો, એટલા માટે કે આ સમાન સિવિલ કોડની કલમ ૪૪, ધાર્મિક સ્વતંત્રતાની કલમ સાથે ટકરાય છે. એટલે કાં તો એમાં સંશોધન કરવામાં આવે અથવા ખતમ કરવામાં આવે. અલબત્ત ડો. ભીમરાવ આંબેડકરે આશ્વાસન આપ્યું કે કોઈના ઉપર સમાન સિવિલ કોડ થોપવામાં આવશે નહી, જે લોકો સ્વેચ્છાએ એને અનુસરશે એમને જ લાગુ પડશે. ઘણી બધી ચર્ચાઓ અને આશ્વાસનોના અંતે આ કલમ સ્વીકારી લેવામાં આવી. પણ .. બંધારણના માર્ગદર્શન સિદ્ઘાંતોની અન્ય કલમો કરતાં આજે આ કલમ ઉપર જ બધું ધ્યાન આપીને મુસલમાનોને રંજાડવાના પ્રયત્નો કરવામાં આવે છે.
     બીજી મહત્વની બાબત આ છે કે બંધારણમાં અુમક બાબતોને બુનિયાદી અધિકારો તરીકે પણ ગણાવવામાં આવ્યા છે. એટલે કે કોઈ પણ સ્થિતિમાં આ બુનિયાદી અધિકારો ભારતમાં વસતા નાગરિકને પ્રાપ્ત રહેશે. અને આ બુનિયાદી અધિકારોને ખતમ કરતો હોય અથવા સિમિત કરતો હોય એવો કોઈ પણ કાયદો અમલપાત્ર ન રહેશે. આ બુનિયાદી અધિકારોમાં ધાર્મિક સ્વતંત્રતા અને ધર્મ ઉપર અમલ કરવાની અને એનો પ્રસાર કરવાની આઝાદી પણ શામેલ છે. એટલે ખરી રીતે જોઈએ તો માર્ગદર્શન સિદ્ઘાંતોની આ બાબત બુનિયાદી અધિકારોની કલમ સાથે સીધી રીતે ટકરાય છે.
     અમારી માંગણી છે કે માર્ગદર્શન સિદ્ઘાંતોને એના સ્થાને રાખવામાં આવે, એમાં સમાનતા, શિક્ષણ, રોજગાર, સ્વાસ્થય સેવાઓ, વગેરે જે બાબતો સમાન રીતે દરેક નાગરિકને લાગુ પડે છે, એને લાગુ કરવામાં જ સાચો યુનિફોર્મ અને સમાનતા છે. સમાન સિવિલ કોડના નામે સરકાર અને જયુડીશરી પોતે જ અમુક તમુક કાયદાઓ અને સિદ્ઘાંતોમાં વાડાબંધી અને ભેદભાવ કરતી હોય તો એને સામાન્ય લોકો માટે કોઈ સમાન કાયદાની વકાલત કરવાનો શો અધિકાર ?